न जाने इस जुबां पे, वो दास्तान किसके हैं,
दिल में मचलते हुए, वो अरमान किसके हैं ?
सोचता हूँ कि खाली है #दिल का हर कोना,
मगर यादों के आखिर, वो तूफ़ान किसके हैं ?
मैं तो खुश हूँ कोई गम नहीं मुझको दोस्तों,
पर दिल में बसे, वो ग़मे अनजान किसके हैं ?
लगता है कि तन्हा ही गुज़र जाएगी #ज़िंदगी,
पर दिल में जो बैठे हैं, वो मेहमान किसके हैं ?
मानता हूँ कि न चला कोई भी साथ दूर तक,
पर सजा रखे हैं, वो साजो सामान किसके हैं ?
दिखता तो ऐसा है कि बस बेख़बर हैं,
पर चेहरे पे उभरे, वो गम के निशान किसके हैं ?
अपनी ज़िन्दगी हम, यूं ही बसर कर लेंगे,
अपने दिल में हम, उनके अज़ाब भर लेंगे...
न होने देंगे जमाने में उनको हम पशेमां,
दुनिया से दूर हम, अपना बसेरा कर लेंगे...
आसमां से तारे तोडना तो बस में नहीं था,
मगर हाँ खुशियों का हम, इंतज़ाम कर लेंगे... #ज़िन्दगी कभी सपनों के सहारे नहीं चलती,
हम असलियत की रौशनी में, गुज़र कर लेंगे...
झूठे सपने दिखा कर प्यार नहीं मिला करता,
जी लेंगे सुकून से, अपने हुनर पे सब्र कर लेंगे...
खोखले वादों से तसल्ली नहीं मिलती है,
मिल कर चले साथ तो, पूरा सफ़र हम कर लेंगे...
#धीरज से संभालिये, तो गुत्थी खुद सुलझ जायेगी,
वरना तो हड़बड़ी में ये, और ज्यादा उलझ जायेगी !
भरोसे की नींव पर टिकी होती है #रिश्ते की दीवार,
अगर खिसकेगी इक ईंट भी, फिर न संभल पायेगी !
ग़लतफ़हमियों को ज़िगर में सजाना छोड़ दो यारो,
वर्ना ग़मों से लवरेज़ उम्र, बस यूं ही निकल जाएगी !
बिखरते देखे हैं कितने ही #रिश्ते मैंने इसी सबब से,
न समझोगे बात इतनी, तो हाथों से फिसल जाएगी !
बेहतर है कि मिल बैठ कर सुलझा लो शिकवे,
वरना तो वर्षों की #मोहब्बत, नफ़रत में बदल जाएगी !