जुगनुओं की रोशनी से, अँधेरा हटा नहीं करता,
कभी शबनम की बूंदों से, दरिया बहा नहीं करता !
भले ही फंस जाये दुष्टों की चालों में इंसान कभी,
मगर कभी सच के सामने, झूठ टिका नहीं करता !
गर #ज़िन्दगी में गम नहीं तो जीने का मज़ा क्या,
सिर्फ खुशियों के नाम पर, वक़्त कटा नहीं करता !
उम्र गुज़र जाती हैं किसी का इंतज़ार करते करते,
मगर #मोहब्बत में आशिक़, पीछे हटा नहीं करता !
आईने के सामने कितना ही मुंह बनाइये,
पर उसके सामने कभी, कोई दाग छुपा नहीं करता
जीना चाहा तो ज़िन्दगी, दूर होती चली गयी !
कमाल ये कि हर शै, मजबूर होती चली गयी !
चाहने न चाहने से कुछ भी नहीं हुआ करता,
जिस चीज़ को भी चाहा, दूर होती चली गयी !
समझते थे हम दुनिया #महफ़िल है खुशियों की,
पर वक़्त के साथ वो भी, क्रूर होती चली गयी !
पागल थे हर किसी पर जान छिड़कते रहे हम,
पर दिल की मज़बूरी, मजबूर होती चली गयी !
अपनाया जिसने चाहा मतलब के लिए,
हमारे लिए तो #दोस्ती, दस्तूर होती चली गयी !