आंसुओं को देखा तो जुबां हिला न सके
दिल में दबे तूफ़ान उनको दिखा न सके
दिल खो गया अंधेरों के आगोश में कहीं
उनकी आँखों से आँखें हम मिला न सके
बेखबर चले आये थे उनकी महफ़िल में
अफ़सोस कि दिल का अँधेरा मिटा न सके
देखते रह गए अपने अरमानों का हशर हम
अपने आंसुओं को पलकों में छिपा न सके
ये तक़दीर भी क्या गुल खिलाती रही ,
हारे हुए दिल को कभी भी हम जिता न सके
आज फिर कही मर जाने को जी चाहता है,
आज फिर किसी को #रुला जाने को जी #चाहता है... #थक गया हूँ यारों दुनिया के #सितमों से,
आज फिर कही #डूब जाने को जी #चाहता है..
बना लिए कितने #रिश्ते दुनिया के भँवर में,
आज फिर उन #रिश्तों को #छोड़ जाने को जी चाहता है...
देख लिए बहुत अब #अपने परायों के मँजर,
उन #मँजर को #भूल कही सो जाने को जी #चाहता है...
नही कर सकता मैं #जिन्दगी का ओर #सफ़र,
अब तो #खुदा की रहमत में #चले जाने को #जी चाहता है... :(
लोग अपनी बीबिओं का हर नाज़ उठाते हैं
उनकी हर ख्वाहिश को दिल से निभाते हैं
पर जब उसकी कोख में बेटी आती है,
कुछ लोग खुशी की जगह मातम मनाते हैं
मत भूलो कि तुम्हारी मां भी किसी की बेटी है
तुम्हारी अपनी प्रियतमा भी किसी की बेटी है
ये ना होती तो कुछ भी ना होता दुनिया में,
फिर क्यों बेचारी बेटी की किस्मत इतनी हेटी है ?