Japan mein 2 dost the..
1 ka naam tha “jo” aur dusre ka naam tha “wo”
Ek din “jo” ke paas Jinn aa gaya
“jo” ne dar kar “wo” ko awaz di...
“wo” bhag kar aaya to Jinn ko dekh kar
“wo" mar gaya
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bus usi din se hi kehte hain…
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“JO” DAR GAYA, “WO” MAR GAYA..
सदा नहीं उड़ सकता पंछी लौट जमीं पर आता है
एक बार में उड़ कर पंछी #मंजिल कभी न पाता है
उड़ो #गगन में रहो धरा पर तुम मंजिल पा जाओगे #जीवन के इस रंग मंच पर अपना नाम कमा जाओगे
जो #जमीन पर रहता है उसका कुछ नुकसान नहीं
गिर कर फिर उठ सकता है इसमें कुछ अपमान नहीं (y)
जिस बस्ती में अंधे रहते हों वहां आईनों की जरूरत कोई नहीं
जो लाठी से डगर को पहचाने वहां समझाने की जरूरत कोई नहीं
जो जीते और मरते अपने लिये वहां मुहब्बत की जरूरत कोई नहीं
जो मन का उजियारा ना चाहे वहां उपदेशों की जरूरत कोई नहीं
गर गुलिश्तां है जिंदगी, तो इसकी मंज़िल श्मशान क्यों है
बिछड़ना ही है अगर प्यार में, तो वो इतना हैरान क्यों है
गर जीना है मरने के लिये, तो फिर जिंदगी वरदान क्यों है
अजनबी से क्यों होजाता है प्यार, दिल इतना नादान क्यों है
इस सच को सब जानते हैं लेकिन फिर भी परेशान क्यों हैं
गुलशन में कभी तो फिज़ां आयेगी "मिश्र" इतना हैरान क्यों हैं