Page - 117

Bas Isliye khamosh hoon

ज़रा सी है ज़िंदगी, बस इसलिये ख़ामोश हूँ
लोग पूछेंगे क्या बात है, इसलिये ख़ामोश हूँ
सब्र का बांध कब टूट जाये क्या पता यारो,
किस्मत अभी ख़िलाफ है, इसलिये ख़ामोश हूँ

मुश्किलें ज़रूर हैं मगर अभी ठहरा नहीं हूँ ,
अभी कांटे हटाना शेष है, इसलिये ख़ामोश हूँ
मंज़िलों से कह दो कि पहचूँगा ज़रूर उनतक,
मुश्किलों में कारवाँ है, बस इसलिये ख़ामोश हूँ
सोचता हूँ बता दूं अपनी दास्ता न ए मोहब्बत
पर सब पूंछेंगे वो कोंन है, इस लिये ख़ामोश हूँ...

Ek Lamha hi kaafi hai

प्यासे के लिये एक कतरा भी बहुत होता है
डूबते हुए को तिनके का सहारा बहुत होता है
डूब जाता है दिल जब ग़मों के समंदर में तो
एक झूठे प्यार का दिखावा भी बहुत होता है
नासमझ नहीं समझ पाते सीधी सी बात भी
लेकिन अक्लमंद को इक इशारा बहुत होता है
किसी की झलक पाने को क्यों बेताब हो दोस्त
दीदार के लिये तो एक लम्हा भी बहुत होता है <3

Mohabbat haar ke jaa rahe

हम महफिल से जा रहे हैं, मोहब्बत को हार के
लम्हें न भूल पायेंगे, जो पहलू में बिताये यार के
वीरान है गुलशन भी फिज़ां भी उदास दिखती है
न जाने अब कब आयेंगे, फिर से दिन बहार के
फुरसत मिले तो कर लेना याद हमारी भी यारा
तब तुमको याद आयेंगे, हर लम्हें अपने प्यार के
इक वक़्त वो भी था कि दीवानगी की हद थी
अब उम्र भर जीना पड़ेगा, यूं ही बिना दीदार के...

Waqt to guzar jayega

वक़्त को गुज़रना है, वो तो गुज़र जायेगा
ये दौलत का नशा भी, कल उतर जायेगा
समेट रखा है जो तूने ये सब कुछ यारा,
वक़्त की हवा में, सब कुछ बिखर जायेगा
गर डूबते हुए भी कस्ती को संभलोगे तो,
तुम न सही, तो कोई तो पार उतर जायेगा
क्यों तोड़ते हो काँच के मानिंद रिश्तों को,
कोई सा टुकड़ा, दिल में चुभन भर जायेगा
क्यों मदहोश है तू देख के गुलशन अपना,
इसे तो पतझड़, कभी भी वीरान कर जायेगा...

Wafaa ke badle Bewafai naa

Wafaa ke badle bewafai naa diya karo,
Meri umeed thukra ke inkaar naa kiya karo,
Teri #Mohabbat me hum sab kuch kho bethe,
Jaan chali jayegi yu imtihaan naa liya karo....