अब कुछ कहने कुछ सुनने से डरता हूँ मैं
उनकी महफिल में भी जाने से डरता हूँ मैं
कभी बात करते थे हम जान तक देने की
या खुदा अब तो उनके साये से डरता हूँ मैं
हमें प्यार है उनसे जानता है ज़माना सारा
पर अफ़सोस उन्हें खुद बताने से डरता हूँ मैं
अंधेरों में रहने की आदत पड़ी है इस क़दर
अब तो दिल में दीपक जलाने से डरता हूँ मैं
ख़ुदा ने इंसान बनाया इस दुनिया क़ी ख़ातिर
अफसोस ख़ुद को इंसान बताने से डरता हूँ मैं
Koshish Kar Tu, Aaghaz Kar Anjam Ho Jayega,
Tera Safar Ek Bemisaal Qayam Ho Jayega,
Main Ye Nahi Kehta Ke Mukaddar Se Parhez Kar,
Kuch Aisa Kar Ki Mukaddar Bhi Tera Gulam Ho Jayega...
दुनिया की बेरुख़ी ने, चुप रहना सिखा दिया
ज़िंदगी का हर गम, हमें सहना सिखा दिया
नहीं होता अहसास हमें किसी दर्द का अब,
यूंही क़ातिलों के बीच, हमें रहना सिखा दिया
बहुत शुक्रिया उन राहों के पत्थरों का दोस्तोि,
जिन की ठोकरों ने, हमें चलना सिखा दिया
ये करम है इस खुदगर्ज़ जमाने का दोस्तो,
कि दुश्मन दोस्त में, फ़र्क करना सिखा दिया...