Fir Dastak Di Kisi Ne
दिल की दहलीज पर, फिर दस्तक दी है किसी ने
आज मेरे अरमानों को, फिर महक दी है किसी ने
अंधेरों में गुम ज़िंदगी जी रहा था मैं तो,
पर बुझते हुए दीये को, फिर चमक दी है किसी ने
दिल की दहलीज पर, फिर दस्तक दी है किसी ने
आज मेरे अरमानों को, फिर महक दी है किसी ने
अंधेरों में गुम ज़िंदगी जी रहा था मैं तो,
पर बुझते हुए दीये को, फिर चमक दी है किसी ने
मेरी तक़दीर जाने कहाँ सो गयी है
अधरों की मुस्कान कहाँ खो गयी है
जीने की चाहत गयी है ठहर सी
मानो ज़िंदगी हमसे ख़फा हो गयी है
चाहत में एक कर दिये रात दिन
वो चाहत भी हमसे ज़ुदा हो गयी है
हमें गुमान था वो अपने हैं शायद
वो गलतफहमी अब दफा हो गयी है
सोचते थे उन पर है सिर्फ हक़ हमारा
पर उन पर तो दुनिया फिदा हो गयी है
बात यहीं खत्म होती तो शुक्र था पर
उनकी मोहब्बत अब ख़ुदा हो गयी है
मौत से क्यों डरते हैं हम, उसे तो आना ज़रूर है
क़फन तो अखिरी चोला है, उसको बदलना ज़रूर है
इस रुखसती को देख कर क्यों ग़मगीन हो दोस्त,
आज किसी का कल किसी का, जनाज़ा उठना ज़रूर है
किसी को शमशान पहुंचा कर क्यों रोते हैं लोग,
जबकि हर किसी को एक दिन, वहां जाना ज़रूर है
दुनिया के राग रंग में यूंही डूब जाते हैं लोग,
जबकि यहाँ से सब कुछ छोड़ कर, जाना ज़रूर है...
इन फरेबों से भरी दुनिया में, ऐतबार है दोस्ती,
अपनी मंज़िल पाने के लिये, सह सवार है दोस्ती,
क्यों गुमसुम हो तनहाइयों के धुंधलके में यारो,
जीवन की अंधेरी राहों के लिये, उजियार है दोस्ती
कोई किसी के मन की पीड़ नहीं देखता
कोई किसी की फूटी तकदीर नहीं देखता
औरों में कमियां ढूढ़ता है हर कोई मगर,
अपने #दिल की मैली तस्वीर नहीं देखता...