प्यार की बातें, दिल से लगाना छोड़ दिया हमने
बहुत रो लिये, अब आंसू बहाना छोड़ दिया हमने
बहुत बेवफाइयां झेली हैं इस दिल ने यारो,
हँसना ही क्या, अब तो मुस्कराना छोड़ दिया हमने
अपनों के दिये ज़ख्मों से बेचैन है ये दिल,
उनके पहलू में, अब सर झुकाना छोड़ दिया हमने
सारी उम्र मुश्किलों से जूझते रहे रात दिन,
अब जमाने को, अपने ग़म बताना छोड़ दिया हमने
तमाशबीन है ये दुनिया उसका क्या कहिये,
अब मदारी बन, उसे खेल दिखाना छोड़ दिया हमने
वक़्त गुज़र कर यूं चला गया,
हम बचपन के हल्ले भूल गये
जहाँ दौड़ दौड़ कर वचपन बीता,
हम वो गली मोहल्ले भूल गये
जिनके साथ ये बचपन गुज़रा,
हमतो उनके भी चेहरे भूल गये
जिस घर में मां की ममता पायी,
हम उस घर के मंज़र भूल गये
महलों की चमक में ऐसे खोये,
अपने मिट्टी के घरोंदे भूल गये
जिस मिट्टी में लोट कर बड़े हुए,
हम उसकी सोंधी खुश्बू भूल गये
भौतिक सुख में कुछ ऐसे डूबे,
हम कुदरत की छटाएं भूल गये
हम ऐसे बसे परदेस में आकर,
अपने घर के ही रस्ते भूल गये...
दुनिया के मेले में खो गये सारे रिश्ते,
आज उनको संजोने को जी चाहता है
जो बेरुखी से तोड़े थे अपनों के दिल,
आज फिर से मिलाने को जी चाहता है
हम खूब झूठ बोले थे अपने आप से,
सिर्फ सच बोलने को अब जी चाहता है
यूं ही सपनों में हमारी सारी उम्र गुज़री,
अब हक़ीक़त में जीने को जी चाहता है
जो ख़्वाब देखे अपने ख़्वाबों में हमने,
आज उन्हें सच बनाने को जी चाहता है
यूं ही अंधेरों में बिता दी सारी उम्र हमने,
अब उजालों में उड़ने को जी चाहता है...
Taaron mein chand akela jagmagata hai,
mushkilo mein insan akela dagmagata hai,
aye dost
kaanton se mat ghabrana
kaanton mein hi to gulab muskrata hai...