इस तबस्सुम को ग़मों में लुटा मत देना
कोई आंसू का मोती आँखों से गिरा मत देना..
ख़ाब में आये हैं दोस्त थोडा वक़्त निकालकर
गुफ्तगुं ज़ारी है #नींद से जगा मत देना..
शहजादा कोई आएगा है उम्मीद उसको भी
ज़माने की हकीक़त उसे बता मत देना..
घोंसले गिर चुके इनके तरक्की की आंधी में
जो बैठे हों पंछी मुंडेर पर उड़ा मत देना..
इस बज़्म में 'शाकिर' तमाशबीन बहुत हैं
हाल -ए-दिल अपना खुद को भी सुना मत देना..
शबनम किसी की प्यास मिटा नहीं सकती
सुई का काम कभी तलवार बना नहीं सकती
दिल का मारा समझता है ज़रूरत दिल की,
ये बात किसी और को समझ आ नहीं सकती
इश्क़ की कहानी होती है बड़ी अजीब सी,
जिसे अजीब दुनिया सुनकर पचा नहीं सकती
इश्क़ के दीवाने जलते हैं जिस आग में,
कोई घनघोर बारिश भी उसे बुझा नहीं सकती...
Aasman se Utari hai, Taaron se Sajai hai,
Chand ki Chandni se Nehlai hai,
E Dost! Sambhal ke rakhna ye Dosti,
Yahi to Hamari Zindagi bhar ki Kamai hai....
क्या उनके लबों ने कभी मेरा गीत गुनगुनाया होगा
क्या किसी के पूछने पर उसने मेरा नाम बताया होगा
सुन के मंज़र मेरी बर्बादियों का किसी और से
क्या उनके खयालों में मेरा अक्श उभर आया होगा
बड़ी खुशफहमी पाल रखी है दिल ने उनके लिये
भला मेरे बदहाल से उन पर क्यों असर आया होगा
अपनी बेवफाई का आलम भूल पायेंगे कैसे भला
उन का दिया वो दर्द क्या उनको समझ आया होगा
हम तो गुनाहगार मानते हैं ख़ुद को अब भी
क्या उनके भी दिल में कभी ये ख्याल आया होगा...