मुस्कान तो देखी मगर, दिल का बबंडर नहीं देखा
चेहरे की चमक देखी, पर मन के अंदर नहीं देखा
खुशियों के नज़ारे देखते रहे ज़िंदगी भर,
पर कभी दर्द से मरने वालों का, मंज़र नहीं देखा
शीशे के महल तो बनवा लिये शौक से,
पर कब टकरा कर तोड़ दे, वो पत्थर नहीं देखा
अपनों से बिछड़ने का दर्द वो क्या जानेँ,
जिसने ज़िंदगी में अपनों से, मिल कर नहीं देखा
वाह! औरों में ढूढता फिरता हैं कमियां वो,
जिसने अपना गिरेवां, कभी झाँक कर नहीं देखा...
आज कल दुनिया में भला मुस्कराता कौन है
ज़िंदगी की इस दौड़ में हंसता हंसाता कौन है
तारों को ताकते गुज़र जाती हो रात जिनकी,
उनको क्या पता कि ख्वाबों में आता कौन है....
सबके दिल में होती है मुस्कराने की चाहत,
पर उनके होठों से हंसी आखिर चुराता कौन है
इस पेट कि खातिर भागती दौड़ती है दुनिया,
अब हंसने के लिये भला वक़्त बचाता कौन है
मैं कभी किसी की राह में, कांटे नहीं बिछाता
मैं किसी हमराह को, ग़लत राह नहीं दिखाता
हर किसी को चलने का हक़ है राहों में,
अपनी खातिर किसी को, किनारे नहीं लगाता
कोई दौड़ता है तो दौडे ये है उसका हुनर,
मैं कभी किसी के हुनर में, कमियां नहीं बताता
जीने की कला होती है सबकी अलग अलग
मैं किसी की ज़िंदगी में, अपने उसूल नहीं लगाता