बिना मतलब, कोई किसी का साथ नहीं देता,
कोई भी बिना लूटे, किसी को खैरात नहीं देता !
झूठ और मक्कारियों का चल पड़ा है दौर अब,
इस जहां में अब, कोई ईमान का साथ नहीं देता !
अब तो है जी हुज़ूरी ही कुशलता का प्रमाण पत्र,
मेहनत के बदले में, अब कोई सौगात नहीं देता !
बदमाश बन कर भले ही जीना हराम हो उसका,
फिर भी ये आदमी, शराफ़त का साथ नहीं देता !
दोस्तो अब रिश्ते भी ख़त्म हो चुके हैं इस कदर,
कि अब तो अपना भी, अपनों का साथ नहीं देता !!!
जो अपनों का न हुआ, वो भला गैरों का क्या होगा,
जो जमीं का न हुआ, वो आसमानों का क्या होगा !
उसे ज़िन्दगी भर न रास आई ख़ुदा की ख़ुदाई भी,
जो भला ख़ुदा का न हुआ, वो बन्दों का क्या होगा !
शरीर में उसके दिल की जगह पत्थर रखा है यारो,
जो भला ज़िन्दों का न हुआ, वो मुर्दों का क्या होगा !
वो कैसा है आदमी कैसी है फितरतें उसकी,
जो मोहब्बतों का न हुआ, वो नफ़रतों का क्या होगा !
जो भी आता है, वो जीने का हुनर बता जाता है,
ज़िन्दगी के हर पहलू पर, उपदेश सुना जाता है !
कैसे कहें कि ज़िन्दगी अभी अधूरी है मेरे दोस्त,
वरना #ज़िन्दगी जीना, हर किसी को आ जाता है !
ये तो रास्ते के कांटे हैं जो रोक देते हैं सफर को,
वरना तो राह चलना, हर किसी को आ जाता है !
इस पेट की खातिर मज़बूर है ये आदमी ,
वर्ना तो आराम करना, हर किसी को आ जाता है !
कभी सपनों को सजाने में, उम्र गुज़र जाती है,
कभी रिश्तों को बचाने में, उम्र गुज़र जाती है !
उजड़ने के लिए तो बस एक लम्हा काफी है,
मगर उस घर को बनाने में, उम्र गुज़र जाती है !
कोई तो खेलता है लाखों करोड़ों की दौलत में,
तो किसी की घर चलाने में, उम्र गुज़र जाती है !
आ जाते हैं ग़म बिन बुलाये मेहमान की तरह.
मगर ज़रा सी ख़ुशी लाने में, उम्र गुज़र जाती है !
वक़्त नहीं लगता अपनी इज़्ज़त गंवाने में दोस्त,
मगर यही इज़्ज़त बनाने में, उम्र गुज़र जाती है !!!
यूं ज़िन्दगी को, समझने से तुम्हें क्या मिलेगा,
उस से खामखा, उलझने से तुम्हें क्या मिलेगा !
ख़ुशी से जी लो जितना भी लिखा है नसीब में,
यूं ही दिल में, गुबार भरने से तुम्हें क्या मिलेगा !
जो दिया है ख़ुदा ने बस सब्र कर उतने पे यार,
यूं हर चीज़ पर, मर मिटने से तुम्हें क्या मिलेगा !
दुनिया में वैसे भी क्या कमी है ग़मों की दोस्त,
अपने आप से ही, यूं लड़ने से तुम्हें क्या मिलेगा !
मिल जाये यूं ही सब तो ख़ुदा की क्या ज़रुरत,
सोचो, उसके खिलाफ जाने से तुम्हें क्या मिलेगा !
गर आम मीठे है तो जी भर के खा जाओ दोस्त ,
यूं ही बेकार में, उन्हें गिनने से तुम्हें क्या मिलेगा !