जो न मिल सके, उसे पाने की कोशिश न कीजिये,
अंजान को, अपना बनाने की कोशिश न कीजिये !
हर रास्ता मंज़िल पर पहुंचाएगा ये ज़रूरी नहीं,
यूं ही अंजान राहों पे, जाने की कोशिश न कीजिये !
मुखौटे में छुपाए फिरते हैं लोग औकात अपनी,
उनके झांसे में, कभी आने की कोशिश न कीजिये !
तज़ुर्बा है कि नहीं मिलता मुफ्त में कुछ भी कहीं,
खुद को लालच में, फंसाने कि कोशिश न कीजिये !
जल मरते हैं क्यों परवाने भला शमा को क्या खबर,
मगर खुद को यूं ही, जलाने की कोशिश न कीजिये !
नेताओं को जनता में, बस वोट नज़र आती है,
जनता तो पागल है, बस ये सोच नज़र आती है!
खुद को बताते हैं वो दूध के धुले हुए मगर,
अपने हर विपक्षी में, उन्हें खोट नज़र आती है !
गलती से पूंछता है उनके मंसूबों को गर कोई,
तो उनके मुखौटों पर, गहरी चोट नज़र आती है !
जनता से माँगना है तो दिलों को साफ़ रखिये,
उसको तुम्हारे अभिनय में, खोट नज़र आती है !
उतार कर मुखौटे दिखा दो उसे असली चेहरा,
मिट जाएगी दिलों से वो, जो लोच नज़र आती है !