मेरी ज़ुबान के हर लफ्ज़ पर ज़िकर तेरा होगा,
तुझसे दूर हो कर भी दिल को फ़िक्र तेरा होगा
चाहे कोई कुछ कहता रहे दिल में घर तेरा होगा
जो जीते जी तेरा ना हो सका वो मर कर तेरा होगा
सदा के लिए बस तेरे #दिल में रह कर तेरा होगा
डाल से टूट कर भी फूल खुशबू छोड़ जाता है
मिटटी में मिलने तक मुस्कान छोड़ जाता है
हर इंसान का #अंदाज़ जुदा होता है दोस्तो
कोई रुलाता है तो कोई खुशियाँ छोड़ जाता है
कोई तो साथ निभाता है आखिरी मंज़िल तक
मगर कोई बीच सफर में अकेला छोड़ जाता है
जो जीता है जमाने में फूलों की तरह ,
वो खुद रहे न रहे पर अपना नाम छोड़ जाता है
दुनिया ने ठोकर मार कर, हमको चलना सिखा दिया
इस जीवन के रंज़ो ग़म ने, हमको रहना सिखा दिया
बनते रहे मतलब के रिश्ते #प्यार का पहने मुखौटा,
पर दुनिया की नसीहतों ने, हमको पढ़ना सिखा दिया
धन तो मिल गया लेकिन, सुकून की दौलत न मिली
घर तो मिला लेकिन हमें, रहने की मोहलत न मिली
दौड़ते रहे यूं ही झूठी शानो शौकत के लिए इधर उधर,
किसको कहें हम अपना, समझने की फुर्सत न मिली...
दुनिया में खुशियों के नज़ारे, कम नज़र आते हैं,
हर किसी के दिल में, गम ही गम नज़र आते हैं !
जब ठहर जाता है #ज़िन्दगी का कारवां कहीं पे,
पीछे यादों की गर्द, आगे रस्ते बंद नज़र आते हैं !
फ़ितरतों से बाज़ नहीं आता फिर भी ये आदमी,
मुखौटा #प्यार का, पर दिलों में ख़म नज़र आते हैं !
दिन रैन लगे रहते हैं लोगों का हितैषी जताने में,
मगर ईमानो धरम, खोये हुए हरदम नज़र आते हैं !
अंत नहीं ख्वाहिशों का लोगों के दिलों में दोस्तों,
अधूरी ख्वाहिशें से आहत, चेहरे बेदम नज़र आते हैं !