Page - 82

Insan Hai Wo Khuda Nahi

इक वो बदनसीब, जिसका कोई चाहने वाला नहीं,
इक वो दीवाना, जिसका कोई दीवाना नहीं
है एक परवाना, जिसका कोई ठिकाना नहीं,
करते हो क्यूँ जीना उसका दुश्वर यारों,
जब तुमने उसे कभी जाना ही नही
कुछ  माहिर है वो सितम सहने में ,
यूँ किसी के #नखरे उठाने वाला नही
नही पता क्या सोचकर देते है दर्द
इन्सान है यारो कोई खुदा रहमत वाला नहीं

Kabhi Udas Nahi Hote

ये खुशियों के लम्हात, हमेशा पास नहीं होते
जो जानते हैं जीना, वो कभी #उदास नहीं होते
किस्मत #दिल समझाने का जरिया है,
मेहनत वाले कभी, किस्मत के दास नहीं होते...

Khuda kisi ko ghamand na de

बहुत ही जूनून था, हमें लोगों पर दया करने का
खुद को मिटा कर भी, उनका ही भला करने का
समझ न पाये हम उनके #दिल में दबे लावों को,
अफसोस हो रहा है, अब खुद को फ़ना करने का
हम तो लुटाते रहे अपनों पर मोहब्बत बेशुमार,
पर क्या मिला हमको, अपना हक़ अदा करने का
या ख़ुदा न दे घमंड इतना कि आदमी बदल जाये,
और न बचे वक़्त ही, तेरा शुक्रिया अदा करने का
देखा है इन आँखों ने उन बदलते दिलों को,
जिन्हें दे दिया हक़ दौलत ने, कोई ख़ता करने का...

Maa baap ke liye kuch nahi

पत्थर की मूर्तियों के लिए जगह है घर में, मगर
माँ बाप के लिए एक कोना भी मयस्सर नहीं !
कुत्तों के लिए मखमल के बिछौने ज़रूरी हैं, मगर
माँ बाप के लिए सादा बिछौना मयस्सर नहीं !
अपने भूखे कुत्तों के लिए बोटियाँ ज़रूरी हैं, मगर
माँ बाप के लिए भर पेट खाना मयस्सर नहीं !
दिखाती थी जिसे चाँद का टुकड़ा बता कर, मगर
उसीके मेहमानों के बीच आना मयस्सर नहीं !
बनाया था ये आशियाना कितने जतन से, मगर
अब अपने ही द्वार पर बैठना मयस्सर नहीं !
जिसको उंगली पकड़ कर चलना सिखाया ,
उसका आज बिल्कुल भी सहारा मयस्सर नहीं !

Hawa ke rukh ko badal nhi

#हवा के रुख को कोई #बदल नही सकता,
#सूरज के #ताप को कोई सह नही सकता...
कर ले चाहे कोई कितने ही बदलावों की कोशिशें,
#खुदा के बनाए अग़ाजों को कोई बदल नही सकता...