न मिली मंज़िल तो, राहें बदल डालीं
वक़्त बदला तो, निगाहें बदल डालीं
आसमानों को छूने का दम था मगर,
हमने तो अपनी, उड़ानें बदल डालीं
बड़ी शान थी कभी इस #शहर में मगर,
हालात बदले तो, महफ़िलें बदल डालीं
काँटों की चुभन इस क़दर रास आई कि,
हमने तो गुलों से, मोहब्बतें बदल डालीं
जीने के लिए और क्या चाहिए ?
हमने हँसने रोने की, आदतें बदल डालीं...
वक़्त के साथ, लोगों की फ़ितरत बदल जाती है
शौहरत के साथ, लोगों की चाहत बदल जाती है
एक वक़्त था कि #मुस्करा के उठते थे सुबह हम,
आज उठते हैं तो, चेहरे की रंगत बदल जाती है
दिखती हैं खड़ी मुसीबतें मुंह बाये सामने रोज़,
दिन ढलते ढलते, चेहरे की हालत बदल जाती है
सुबह जो खाते हैं ईमान ओ वफ़ा की कसम यारो,
सुबह से शाम होते, उनकी नीयत बदल जाती है
बिगड़ जाते हैं रिश्ते इस जुबाँ के तीरों से,
इनकी तीखी चुभन से, उनकी सूरत बदल जाती है...
ज़िन्दगी से उलझने से क्या फायदा
दुनिया को समझने से क्या फायदा
बदली है #दुनिया तो तू भी बदल जा
यूं निरर्थक मचलने से क्या फायदा
क्यों भर रखा है दिल में गुवारों को
यूं घुट घुट के मरने से क्या फायदा
गुज़ारे लम्हों को भला क्या सोचना
अपने आप से लड़ने से क्या फायदा
न तेरे बस की तो छोड़ दे #भगवान पे,
खुद ही #खुदा बनने से क्या फायदा
जो दिया है ख़ुदा ने सब्र कर उस पर
आफतों को खरीदने से क्या फायदा
मिलेगी #मंज़िल भी संभल कर चल
गलत राहों पे चलने से क्या फायदा
नहीं मिलती है मांगने से एक अदद ख़ुशी,
मगर बिन मांगे ग़म हज़ार मिल जाते हैं |
नहीं मिलता ढूढ़ने से कहीं एक भी अपना,
मगर बिन ढूंढें #दुश्मन हज़ार मिल जाते हैं |
जो दूर से दिखता है ज़रूरी नहीं कि हो वैसा,
यहां तो अनचाहे धोखे हज़ार मिल जाते हैं |
ज़रा संभल कर चलना #ज़िन्दगी की राहों पे,
यहां तो हर कदम पे रोड़े हज़ार मिल जाते हैं |
किसी पे यकीन करना बुरा नहीं होता,
पर इस दुनिया में बेवफा हज़ार मिल जाते हैं |