गुज़रती है जिनके ज़िगर पर आँखों से नहीं रोते
वो घुट घुट कर मरते हैं और दिन रात नहीं सोते
ज़माने में जो देखा है वो बिल्कुल सच है दोस्तों
कि जो कभी अपनों के न हुए वो गैरों के नहीं होते
कभी बेवजह बिखर जाते हैं प्यारे से अटूट रिश्ते
बाद कितनी भी कोशिशों के वो जीवित नहीं होते
जो आज है पास हमारे हमेशा नहीं रहता,
गुज़र जाते हैं जो लम्हें वो कभी वापस नहीं होते
गर मुझे मुकद्दर पे ऐतबार है तो तेरी वजह से
घर का गुलशन गर गुलज़ार है तो तेरी वजह से
आज दुनिया मेरी तलबगार है तो तेरी वजह से
मुझको अपनों से इतना प्यार है तो तेरी वजह से
तू ही बता दे कैसे भुला दूँ तुझको अय मेरे ख़ुदा
आज मेरी रगों में खून बरक़रार है तो तेरी वजह से
जब कभी मैं लड़खड़ाया बस तूने उठाया थाम कर
मेरा खुशियों से भरा ये संसार है तो तेरी वजह से
घायल है आदमी इस दुनिया की ठोकरों से बेशक
मगर फिर भी दिलों में क़रार है तो तेरी वजह से
जो मुस्कुरा रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा,
जो चल रहा है, उसके पाँव में छाला होगा...
बिना संघर्ष के इन्सान चमक नही सकता,
जो जलेगा उसी दिये में तो, उजाला होगा...
जो न समझा कोई, वो ज़ज्बात हूँ मैं
सुबह की चाह में गुज़री, वो रात हूँ मैं
निभाने से डरते हैं क्यों लोग रिश्ते,
न बिखरे कोई रिश्ता, वो हालात हूँ मैं
हर सवाल का जवाब होता है मगर,
जो लाज़वाब हो बस, वो सवालात हूँ मैं
भागते हैं लोग क्यों छोड़ कर ज़िंदगी,
जो न कर सके कोई, वो करामात हूँ मैं
न सुनता है कोई किसी की बात,
मगर जो है सुनाने के लिए, वो बात हूँ मैं
दिल खुश नहीं, तो ज़माना बुरा लगता है
किसी का भी हमें, घर आना बुरा लगता है
छा जाती है एक अजीब सी धुंध दिल पे,
मधुर संगीत का, हर तराना बुरा लगता है
जब दिल होता है किन्हीं ख़यालों में ग़ुम,
तो ज़िंदगी का, हर अफ़साना बुरा लगता है
हार जीत तो बस एक सोच भर है,
पर किसी हारे हुए को, हराना बुरा लगता है...