तेरे बिना ये ज़िन्दगी भी, एक सज़ा लगती है
दिल की धड़कन भी मुझे, एक कज़ा लगती है
ठंडक पड़ जाती है मेरे दुखते ज़ख्मों में यार,
जब बताते हैं लोग कि, तेरी भी रज़ा लगती है
ज़फ़ाओं की नगरी में मैं किससे उम्मीद करूं,
कभी तो मेरी ज़िन्दगी भी, मुझे खफ़ा लगती है
तेरा हर खून माफ़ है मेरे #दिल की अदालत में,
वो भला क्या जाने कि, कौन सी दफ़ा लगती है...
जो थे दिल के मेहमान कभी, जाने कैसे निकल गए
पक्के थे अपने रिश्ते, क्यों मोम के जैसे पिघल गए
जाने सब कुछ कैसे हुआ हम जाने कैसे भ्रमित हुए,
जिनको हमने अपना जाना, क्यों गैरों जैसे बदल गए
अच्छा हुआ मिट गए ख्वाब जो पाले थे इन आँखों ने,
कल आँखों के नूर थे हम, पर इकदम कैसे बदल गए
ठीक रहा सब देख लिया जीवन के अंतिम लम्हों में,
यहाँ गिरगिट जैसे लोग मिले, जब चाहा वैसे बदल गए...
जो बदनाम थे कल तक, आज वो सुखनवर हो गए
जो थे कल तक बाहर, आज दिलों के अंदर हो गए
हम तो आज भी एक कतरा हैं रुके हुए पानी का,
पर लोग देखते ही देखते, कतरे से समंदर हो गए...
कोई तो कुछ पा कर हँसता है,
तो कोई कुछ खो कर रोता है
कोई तो रातों को तारे गिनता,
तो कोई नींद चैन की सोता है
होती है कभी मिलने की खुशी,
तो कभी गम ए जुदाई होता है
कोई मखमल के गद्दों पे, तो
कोई अख़बार बिछाकर सोता है
किसी पर दौलत की कमी नहीं,
तो कोई इक इक पैसे को रोता है
वैसी ही फसल उगती है खेत में,
जो जैसा भी बीज उधर बोता है
यही यथार्थ है जीवन का "मिश्र",
होती है जैसी जिसकी भी नियत,
उसका वैसा ही आचरण होता है
आइना ए दिल की चाहत, कि पत्थर से अकड़ जाये
ठान रखी है उस पगले ने, कि टुकड़ों में बिखर जाये
जी नहीं भरता उस #दिवाने का उनके एक अक्स से,
सोचता है उनके अक्सों से, उसका ज़िगर भर जाये...