जब वक़्त अच्छा था, तो रिश्ते निखरते चले गए
जब ख़राब दौर आया, तो रिश्ते बिखरते चले गए
आहिस्ता आहिस्ता अपनों ने किनारा कर लिया,
हम तो वही थे दोस्तो, मगर सब बदलते चले गए
दरख़्त जब सूखने लगा यूं वक़्त की मार से यारो,
बेवफा परिंदे भी, अपना ठिकाना बदलते चले गए
मुफ़लिस का कोई दोस्त नहीं हुआ करता,
जो कुछ बचे थे, बेहयाई से रस्ता बदलते चले गए
अपनों की ख़ुशी, दुनिया के ग़म भुला देती है
नेक दिली, एक आदमी को इंसान बना देती है
ज़रा संभल के चलना ज़िंदगी की डगर पर,
ज़रा सी भी चूक, आदमी को शैतान बना देती है
न करो इच्छा किसी से मदद पाने की दोस्त,
औरों की मदद, आदमी को नाकाम बना देती है
जो चीज़ अपनी है उस पर भरोसा करो,
दीगर की चाहत, आदमी को बेईमान बना देती है
Jo koi samajh na sake wo baat hu Main,
Jo dhal ke nayi subah laye wo raat hu Main,
Chhod dete hain log rishte banakar,
Jo kabhi chhod na jaye wo saath hu Main...
दिलों में नफ़रत, चेहरों पर मुस्कान रखते हैं
वो नज़रों से छुपा कर, तीर कमान रखते हैं
मौका मिलते ही उतार देते हैं तीर दिल में,
ग़ज़ब है कि फिर भी, वो शीरी ज़ुबान रखते हैं
कैसा ये शहर यहां हर तरफ यही शोर है, कि
यहाँ के लोग अपनी जेबों में, ईमान रखते हैं
किसी भूखे को एक निबाला न दे सके कभी,
फिर भी ज़न्नत पाने का, वो अरमान रखते हैं...
मुद्दत गुज़र जाती है अपनों को अपना बनाने में,
वक़्त यूं ही गुज़र जाता है बस मुश्किलें सुलझाने में...
कभी लगता है कि #दुनिया में सभी तो अपने हैं,
मगर #जिंदगी सिमट जाती है रिश्तों को निभाने में...