न करता कोई याद, तो ख़ुद ही याद कर लो ,
टूटे हुए रिश्तों को, फिर से आबाद कर लो !
सर झुकाना है अपनों के लिए तो शर्म कैसी, #दिल को गुबारों से, ज़रा सा आज़ाद कर लो !
हर दफ़ा ख़ामोशियों से काम होता नहीं दोस्त,
बात कर के क्यों न, ख़ात्मा ए फसाद कर लो !
रूठों को मनाने में दिखता है बड़ा अपनापन,
वक़्त मिल जाए तो, इसे भी अहसास कर लो !
इस ज़रा सी #ज़िन्दगी का क्या भरोसा है दोस्त,
चाहे तो इसे आबाद कर लो, या बर्बाद कर लो !!!
Bachpan mein suna tha ki,
garmi Uoon mein hoti hai.
skool mein pata chala
garmi June mein hoti hai.
Ghar mein papa ne bataya ki
garmi khoon mein hoti hai.
Zindagi mein bahut dhakke khaye
tab jaakar pata chala ki
Garmi na to khoon mein,
na june mein aur na hi Uoon mein hoti hai,
मेरी ज़िन्दगी को तू, यूं ही परेशान मत कर,
मेरी शराफ़तों को तू, यूं ही बदनाम मत कर !
कुछ तो ख़याल कर ले तू दुनिया जहान का,
तमाशा अपनी फ़ितरत का, सरेआम मत कर !
हर किसी को हक़ है कि वो कैसे जीये मगर,
अपने दिल को, नफरतों का ग़ुलाम मत कर !
ये ख्वाब तो टूटने के लिए ही होते हैं मेरे दोस्त,
ख़ुदा के वास्ते, औरों का जीना हराम मत कर !!!