ग़मों का आलम, बदलते भी देर नहीं लगती,
खुशियों के रंग, बिगड़ते भी देर नहीं लगती !
भुला दिया जिसको कभी बेकार समझ कर,
उसका मुकद्दर, बदलते भी देर नहीं लगती !
जो खाते हैं कसम वफ़ाओं की अच्छे दिनों में,
वक़्त-ए-ग़र्दिश में, बदलते भी देर नहीं लगती !
मौसम का क्या भरोसा कब बदल दे मिज़ाज,
चाल इन हवाओं की, बदलते देर नहीं लगती !
न बहको दोस्त इतना मंज़िल को करीब देख,
अंजाम-ए-सफर को, बदलते भी देर नहीं लगती !!!
हम कोई अकेले नहीं, परेशान और भी हैं,
अभी तो देखा है क्या, मुकाम और भी हैं !
न समझो कि गुज़र गए फरेबों के दिन,
अभी तो ज़िंदगी में, कोहराम और भी हैं !
वो वादे वो इरादे सब झूठ हैं मेरे दोस्त,
अभी ठगने के लिए, इंतज़ाम और भी हैं !
कैसे छूट पाएंगे हम इस जिद्दो ज़हद से,
अभी हमारे सर पर, इल्ज़ाम और भी हैं !
न सोचो कि बात बस इतनी सी है दोस्त,
अभी इस नसीब के, इम्तिहान और भी हैं !!!
लड़की: - लड़के तो नालायक होते हैं,
हम लड़कियां पढ़ाकू होती हैं !
लड़का: - लड़के भी किसी से कम नहीं होते
लड़की: - लड़कियां आगे हैं !
लड़का : - अच्छा एक सवाल का जवाब बता
लड़की: - हाँ पूछो...???
लड़का: - ऐसी क्या चीज़ है
जो फ्रिज में रखने पर भी गर्म ही रहती है ?
लड़की: - पता नहीं
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;:
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लड़का: - गरम मसाला
देखा हम किसी से कम नहीं :D
आज तो दिल में, यादों का चमन सजा बैठा है,
अतीत का हर लम्हा, काबिले याद बना बैठा है !
वक़्त था कि रोज़ मिलते थे अपने यारों से हम,
अब तो कोई कहीं, तो कोई कहीं जमा बैठा है !
आये थे इस शहर में जोशो जवानी लेकर हम,
मगर अब कोई नाना, तो कोई दादा बना बैठा है !
आये थे आशाओं से भरा निश्छल दिल लेकर,
अब कोई अहम्, तो कोई वहम का मारा बैठा है !
हमने भी देखे थे कभी नज़ारे खुली आँखों से,
अब तो उन पर, ये बुढापे का चश्मा चढ़ा बैठा है !
क्या इसी को कहते हैं #ज़िंदगी जीना दोस्त कि,
जो था सहारा औरों का, अब लाचार बना बैठा है !
न पहचान पाओगे अपनों को भी अब,
अब हर कोई, अपने चेहरे पर मुखौटा लगा बैठा है !!!