रूठे गर जमाना भी, तो मना लेंगे हम,
भड़कते हैं शोले भी, तो बुझा देंगे हम !
अपनों का साथ हो तो ग़म कैसा यारो,
फिर ज़ख्मों की टीस भी, भुला देंगे हम ! #ज़िन्दगी को जीने का हुनर आता है हमें,
कच्चे धागों को भी, रेशम बना देंगे हम !
एक सपना जो देखते हैं हर रोज़ ,
कभी दुश्मन को भी, दोस्त बना लेंगे हम !
ये नाम किस के लिए, बदनाम किस के लिए,
ज़रा सी ज़िन्दगी है, अभिमान किस के लिए !
पल का भी न भरोसा है किसी की ज़िंदगी का,
तो फिर वर्षों के लिए, इंतज़ाम किस के लिए !
माना कि तोड़ा है दिल तुम्हारे अपनों ने दोस्त,
पर लेते हो अपने दिल से, इंतक़ाम किस के लिए !
नहीं मानता है तुम्हारा अहसान कोई भी अब ,
फिर आफ़त में फंसाते हो, जान किस के लिए !
कई चेहरे लेकर लोग यहाँ जिया करते हैं,
हम तो बस एक ही चेहरे से #प्यार करते हैं,
ना छुपाया करो तुम इस चेहरे को,
क्योंकि हम इसे देख के ही जिया करते हैं ..