हम तो उस आदमी को, यूं ही इंसान समझ बैठे,
उसकी मोहब्बत को ही, अपना ईमान समझ बैठे !
लुटा बैठे उसके लिए अपना सम्मान भी लेकिन,
उसके हर गम को हम, अपना सामान समझ बैठे !
समझाया ज़िंदगी का हमने फ़लसफ़ा एक दिन,
मगर वो नसीहत को, अपना अपमान समझ बैठे !
न आयी समझ उनके ज़िन्दगी की भूल भुलइयां,
वो तो #ज़िंदगी को, ख़रीदा हुआ गुलाम समझ बैठे !
अफ़सोस कि न समझ सके हम फ़ितरत उसकी
हमारी ग़लतफ़हमी थी, कि उसे इंसान समझ बैठे !
ये गुरूर है आदमी का जो सोचने नहीं देता ,
बड़ी ही टेढ़ी खीर है ये, जिसे तुम आसान समझ बैठे !
मेरी ज़िन्दगी का हर पल, एक किस्सा बन गया,
मेरा वज़ूद किसी और का, एक हिस्सा बन गया !
न जाने कितने आये गए इस ज़िंदगी के मेले में,
पर कुछ से उम्र तमाम का, एक रिश्ता बन गया !
किसी ने तो बना डाला ज़िंदगी को दोज़ख यारो,
तो कोई #ज़िन्दगी के लिए, एक फरिश्ता बन गया !
न थी इतनी आसान मेरी मंज़िले मक़सूद,
अल्लाह के करम से खुद ही, एक रस्ता बन गया !
एक लड़की की शादी से दो दिन पहले
उसकी सहेली बोली :- शादी की सारी
तैयारियां कर ली क्या?
-.-
-.-
-.-
लड़की :- हाँ कर ली,
बस सिम तोड़कर फेंकना बाकी हैं !!!
हर दीवाने को, यूं ही बे-वफ़ा मत कहिए,
मोहब्बत तो खुदा है, इसे सज़ा मत कहिए !
मज़बूरियां भी तो हो सकती हैं किसी की,
यारो इतनी सी खता को, खता मत कहिए !
बेवफ़ा हो गया वो तो कोई नयी बात नहीं,
वो दिल से मेरा यार है, उसे बुरा मत कहिए !
परवाने जल जाते हैं प्यार की लौ में यूं ही,
यारो #मोहब्बत को, खेल तमाशा मत कहिए !
खुशियों का चमन तो बनता है मोहब्बतों से,
नफरतों को दोस्तो, अपना सहारा मत कहिए !