चेहरे पे ग़म, दिल में रुसबाइयां दे गया कोई !
जाते जाते भी, आँखों में रुलाइयां दे गया कोई !
हम अपने दिल को यूं किस तरह संभालें दोस्तो,
हमें तो ज़िन्दगी भर की, तन्हाईयाँ दे गया कोई !
खुशियों से लबरेज़ थी यारो ये ज़िन्दगी हमारी,
पर जाते हुए हमें, दर्द की गहराइयाँ दे गया कोई !
यूं ही भटकते रहे हम इस फरेबों की दुनिया में,
मगर हमें #ज़िन्दगी की, सच्चाइयाँ दे गया कोई !
दुनिया में कोई भी दुश्मन पैदा नहीं होता,
बनाते हैं उन्हें हम, इसकी गवाहियाँ दे गया कोई !
कभी इधर ढूंढ़ता हूँ, तो कभी उधर ढूंढ़ता हूँ,
दिल की हर धड़कन, और कोनों में ढूंढता हूँ
न मिला मुझे बीते कल का कोई भी लम्हां,
मैं कोई अतीत का, प्यारा सा अक्स ढूंढ़ता हूँ
मैं भूल गया रख कर कहीं यादों की पोटली,
मैं अपने बचपन के, खेलों का आँगन ढूंढता हूँ
ऊब सा गया हूँ मैं ये कौन सी उम्र है ,
कि मैं खुद में क्यों, जवानी की धमक ढूंढ़ता हूँ...
दिल को किसी आहट की आस रहती हैं,
नजरो को किसी सूरत की तलाश रहती हैं,
यूं तो हर चीज़ है मेरी #जिंदगी में।
जब तक तुम्हे देख नही लेता तबीयत उदास रहती हैं।।।।
किसी को आखिर हम भुलाएँ कैसे,
किसी को बे सबब हम रुलायें कैसे !
झूठे सपने दिखाना नहीं आता हमें,
किसी को चंगुल में हम फँसाएं कैसे !
कितने ग़म दिए हैं ज़माने ने हमें,
किसी को दर्द ए दिल हम बताएं कैसे !
लोग उड़ाते हैं हंसी हालात की यूं ही,
किसी को मुकद्दर हम दिखाएँ कैसे !
सहते रहे कितनों के फिकरे उम्र भर,
मगर औकात उनकी हम बताएँ कैसे !
भले ही कुचल डाला दिल हमारा,
पर उनको ज़ख्म अपने हम दिखाएँ कैसे !