ये दिल हमारा इस कदर, यूं फटा न होता
अगर ये अपनों के फेर में, यूं फंसा न होता
कुछ तो कुसूर है अपना पिछले जनम का,
वर्ना #नसीब अपना धूल से, यूं पटा न होता
जीत जाता हर कोई ज़िंदगी की जंग यारो,
गर #ज़िन्दगी में अहम का, यूं नशा न होता
किस कदर घुस कर दिलों में मारते हैं लोग,
अगर जान जाते पहले से, यूं हादसा न होता
Dil ne Puchha Dimag Se Ke
Kyun Unke Bare Mein Itna Sochte Ho...
Aur Dimag Ne Hass Ke Bola Ke Tum Bhi To
Har Dhadkan Mein Bas Unhe Hi To Khojte Ho..
Aur Hamare Mein Bas Itna Hi To Farak Hai..
Ke Mein Uhne Kisi Tarah Bhulne K Liye Sochta Hu,
Aur Tum Ohne Kisi Tarah Pane Ke Liye Khojte Ho..
Aapki Khoobsorti Ko Dekh Kar
Ye Chand Bhi Sharma Gya...
Kaha Se Aaya Hai Ye Sitara
Ye Khayal Use Khayalon Mein Pa Gya...
Ab Chahta Hai Vo Bhi Ke
Aapko Sanson Mein Sama Lu...
Kyun Ke Apka Deedar To
Is Sharif Chand Ko Bhi Majnu Bna Gya...
आरज़ू थी मेरे दिल की, कि कोई न मुझसे रूठे !
इस ज़िन्दगी में अपनों का, कभी न साथ छूटे!
करता रहा उम्र भर कोशिशें कुछ इस कदर मैं,
कि रिश्तों की मुलायम डोर, न ज़िन्दगी भर टूटे !
मगर अफसोस न समझा कोई मेरे दर्द को यारो,
गफ़लत की उड़ान में, न जाने कितनों के पर टूटे!
कानों में उड़ेले ज़हर ने ऐसा गुल खिलाया,
कि न जाने कितनों के घर टूटे कितनों के सर फूटे!
आफतों ने ज़िन्दगी को, इस कदर तोड़ दिया
कि ज़माने ने चाहा जिधर, उसे उधर मोड़ दिया
मतलब था जब तलक साथ निभाते रहे लोग,
जब मतलब निकल गया, तो अकेला छोड़ दिया
जानता हूँ ऐसे लोगों को बड़े ही करीब से मैं, कि
अपनी गलतियों का ठीकरा, औरों पे फोड़ दिया
यही तो दस्तूर है अब इस जमाने का दोस्तो, कि
न बना पाये घर अपना, तो औरों का तोड़ दिया...
अब तो #दिल भी क्या है एक खिलौना है बस,
जब तक चाहा खेला, जब चाहा उसको तोड़ दिया...