ना पूछिये कि ये ज़िन्दगी कैसे गुज़री
हमारी वो सहर ओ शाम कैसे गुज़री
मुद्दत गुज़र गयी यूं डूबते उछलते
ये तो दिल जानता है कि कैसे गुज़री
जो थे अपने गैरों से बदतर निकले
सोचो सितारों के बिन रात कैसे गुज़री #मंज़िल तो थी मगर रस्ते न थे खाली
न पूछो कटीली वो रास्ता कैसे गुज़री
उम्र का ढलान है यादें ही यादें हैं
अब क्यों मरें सोच कर कि कैसे गुज़री !!!
Wo muskura rahe hain, humein tanha chod kar,
Kiye hue sare vado ko tod kar...
Unke siva kahin Dil lagta bhi nahi,
Ab kya karenge hum apne Dil ko jod kar !!!
अपने बदनसीब का, मुझको गिला कुछ भी नहीं
पर मुश्किलों के सिवा, मुझको मिला कुछ भी नहीं
हीरे मोतियों में खेलने की चाहत न थी मेरी कभी,
पर मेरे सब्र का सिला, मुझको मिला कुछ भी नहीं
अब तो यूं ही खुश रहना सीख लिया है मैंने यारो,
हमेशा ग़मों में खो कर, मुझको मिला कुछ भी नहीं
अपनों की बेरुखी से दम घुटने लगा है अब,
उठाये नाज़ सबके मगर, मुझको मिला कुछ भी नहीं
ज्यादातर पत्नियाँ
अपने पति की बहनों को प्यार से नहीं देखती,
जबकि सारे पति
अपनी पत्नी की बहनों को #प्यार से ही देखते हैं...
पुरूष वाकई #महान होते हैं,
बस कभी अपनी महानता का ढिंढोरा नहीं पीटते... :D :P
हमसे नफरतों का बोझ अब सहा नहीं जाता
हमसे अपनों के फरेबों में अब रहा नहीं जाता
भुगती है उम्र भर बद गुमानियाँ लोगों की
हमसे किसी का मिज़ाज़ अब सहा नहीं जाता
एक मुद्दत गुज़र गयी उजाले की तलाश में
हमसे अंधेरों का ये मंज़र अब सहा नहीं जाता
कैसे जी लेते हैं लोग दुनिया में अकेले अकेले
हमसे तन्हाइयों में रहना अब सहा नहीं जाता
मनाते रहे ताजिंदगी हम रूठे हुओं को ,
हमसे किसी का यूं रूठना अब सहा नहीं जाता...