Mujhe Bas Mohabbat Chahiye
न मुझे नाम चाहिए न शौहरत चाहिए
खुशी से जीने की बस मोहलत चाहिए
#खुदा कसम मुझे #दौलत की चाहत नहीं
मुझे तो दोस्तों की बस इनायत चाहिए
जाने कल क्या हो किसी को क्या खबर
बस जीने के लिए जरा सी #मोहब्बत चाहिए...
न मुझे नाम चाहिए न शौहरत चाहिए
खुशी से जीने की बस मोहलत चाहिए
#खुदा कसम मुझे #दौलत की चाहत नहीं
मुझे तो दोस्तों की बस इनायत चाहिए
जाने कल क्या हो किसी को क्या खबर
बस जीने के लिए जरा सी #मोहब्बत चाहिए...
अपनों की इज़्ज़त, कभी उछाली नहीं जाती
बुज़ुर्गों की कोई दुआ, कभी खाली नहीं जाती
न उम्र बची है न तो जज़्बात ही रहे अब वैसे,
पर क्या करें दिल की उड़ान, संभाली नहीं जाती
जानते हैं उस वे-वफ़ा की हर फितरत को हम,
मगर कोई बात उसकी, हमसे टाली नहीं जाती
सहने की इतनी ताक़त दी है ख़ुदा ने हमें, कि
किसी के खिलाफ, कोई बात निकाली नहीं जाती
ख़ुदा खैर करे कट जाए ज़िंदगी ख़ुशी से "मिश्र"
अब ग़म की कोई बात, दिल में बिठाली नहीं जाती
आज कल मुस्कराने का, कोई आधार नहीं मिलता
किसी को कैसे कहें अपना, वो आधार नहीं मिलता
फैले पड़े हैं मतलबी रिश्ते हमारी यादों के मलवे में,
पर कहाँ से मिलेगा असली, वो बाज़ार नहीं मिलता
नफरतों की दीवारें खिंच गयी हैं अब हर आँगन में,
कैसे गिराएं इनको, हमें कोई औजार नहीं मिलता
इस कदर ज़हर भरा है हर किसी के दिल में "मिश्र",
पर अफसोस हमें इसका, कोई उपचार नहीं मिलता...
या ख़ुदा, मेरे घर में भले ही अँधेरा रहे
पर उनके घर में #चांदनी का बसेरा रहे
आ जाये हमें #मौत भी तो कोई गम नहीं,
पर उनके दामन में खुशियों का डेरा रहे
मेरे मुकद्दर में हैं बस तन्हाइयों की रातें,
पर हमेशा उनकी #ज़िन्दगी में सवेरा रहे
गर उनका साथ है पार कर लूँगा समंदर भी,
फिर हर तरफ चाहे मुश्किलों का घेरा रहे...
हम तो उनकी अदाओं को, उनका प्यार समझ बैठे
हम उनकी शराफत को, उनका इज़हार समझ बैठे
वो तो इक गुलाब था किसी और के गुलशन का,
पर हम तो उन्हें अपने आँगन की, बहार समझ बैठे
न सोचा न समझा न अपनी तक़दीर को टटोला,
हम और की चाहत पर अपना इख्तियार समझ बैठे
ले उडीं सब कुछ अचानक बे-वक़्त की वो आंधियाँ,
मगर हम पागल उन्हें, मोहब्बत की बयार समझ बैठे...