जो न सिखा सकीं किताबें, ज़िन्दगी ने सिखा दिया
उसने चेहरे की इबारतों को, हमें पढ़ना सिखा दिया
जो झूठ का नक़ाब ओढ़े बनते थे हमारे जानो जिगर,
उनकी असलियत से परदा, हमें उठाना सिखा दिया
जो अल्फ़ाज़ हलक़ में फंसे रहते थे काँटों की तरह
इस दुनिया के सामने अब, हमें कहना सिखा दिया
उलझनों के दरिया से कई बार डूब कर बच निकले,
खुदाया #जिंदगी के झटकों ने, हमें तैरना सिखा दिया...
जिधर देखो दुनिया में, बस दिखता है आदमी
फिर भी क्यों तन्हा सा, यहाँ दिखता है आदमी
चुप चाप जमाने के सहते हुए ज़ुल्मो सितम,
खुद ही अपनी लाश को, लिए फिरता है आदमी
अजीबो गरीब दुनिया का ये कैसा चलन है,
आदमी के ही हाथों रोज़, यहां मरता हैं आदमी
इक पल का चैन मयस्सर नहीं किसी को कभी,
ज़िन्दगी भर फ़िक्र से ही, यहां मरता है आदमी
चिंता से भरी रातें तो गुज़र जाती हैं जैसे तैसे
फिर सुबह से शाम तक, बिकता फिरता है आदमी
कही कुदरत की मार कभी सियासत के लफड़े,
यूं ही दुनिया के कष्टों में, यहां घुटता है आदमी...
लोग कहते हैं ज़मीं पर किसी को खुदा नहीं मिलता,
शायद उन लोगों को दोस्त कोई तुम-सा नहीं मिलता…
किस्मत वालों को ही मिलती है पनाह किसी के #दिल में,
यूं हर शख़्स को तो जन्नत का पता नहीं मिलता…
अपने सायें से भी ज़यादा यकीं है मुझे तुम पर,
अंधेरों में तुम तो मिल जाते हो, साया नहीं मिलता...
इस बेवफ़ा ज़िन्दगी से शायद मुझे इतनी #मोहब्बत ना होती,
अगर इस ज़िंदगी में #दोस्त कोई तुम जैसा नहीं मिलता…!!
मजबूर थे जो #मोहब्बत हम ज़ता न सके,,, #ज़ख्म खाते रहे मगर किसी को बता न सके...
चाहतों की हद तक #चाहा उनको यारो,,,
पर अपना #दिल निकाल कर उन्हें #दिखा न सके...
चाहते है उनको कितना हम,,, #अफ़सोस कि उनको ये #ज़ता न सके...
जब न कर सके #इक़रार उनसे #मोहब्बत का यारों...
तो हम भी #दर्दे दिल की #दांस्ताँ बता न सके...!!
Agar Aansu na hote to
aankhien itni kubhsurat na hoti #Dard na hota Dil me to
khushiyon ki keemat na hoti...
poori hoti sab murade
to aaj ummido ki jarurat na hoti...