Kasoor kisi ka Saza Kisi Ko
आग तो सूरज उगलता है, पर धरती तड़पती है
गुनाह तो आँखें करती हैं, पर छाती धड़कती है
यही तो फलसफ़ा है इस जमाने का,
कुसूर किसी का, पर दुनिया किसी को पकड़ती है
आग तो सूरज उगलता है, पर धरती तड़पती है
गुनाह तो आँखें करती हैं, पर छाती धड़कती है
यही तो फलसफ़ा है इस जमाने का,
कुसूर किसी का, पर दुनिया किसी को पकड़ती है
In Aankhon Ki Baat Jo Bayaan Hoti
To Apka Pyar Aaj Hamari Pehchaan Hoti
Chhod Dete Hum Bhi Is Jahaan Ko
Agar Apke Dil Mein Jagah Tamaam Hoti
आज कल हर गली में वोटों के भिखारी निकल पड़े हैं
कुटिल राजनीति के मझे हुए खिलाडी निकल पड़े हैं
गलतियों का दोष औरों पर मढने का जो चलन है
उसे निभाने के लिये बहुत से अनाड़ी निकल पड़े हैं
जनता को वो झूठे वादे अब फिर से मिलने वाले हैं
हम जनता के सेवक हैं झांसे फिर से मिलने वाले हैं
दुनिया की सारी सुख सुबिधायें अब जनता की हैं
सावधान जनता अब वोटों के भिक्षुक मिलने वाले हैं
मैं फूलों का नहीं कांटों का एहतराम करता हूँ
फ़ितरत है चुभने की फिर भी सलाम करता हूँ
फूलों का क्या भरोसा वो मुस्कराएं कब तक,
सो ज़िंदगी भर की चुभन का इंतज़ाम करता हूँ...
Kya rakha hai roz khud ko uncha batane mein
Thodi si shohrat pa es kadar itrane mein
.
Kuch faisley to us upar wale ke haath hote hain
Nai to kitne hi behtar hain humse es jamane mein.