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Ek boond aankh ka paani hun

Agar rakh sako to ek nishaani hun main
Agar rakh sako to ek aisi kahaani hun main
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Jise rok na paye ye sara jahaan
Vo ek boond aankh ka paani hun main

Gairon Mein Humsafar Mil Jate Hain

कभी वीरानों में भी फूल खिल जाते हैं
कभी गैरों में भी हमसफर मिल जाते हैं
कहीं किसी को कब्र नसीब नहीं होती
तो कहीं कब्रों पर मक़बरे बन जाते हैं

Peene wale ko bahana chahiye

कभी तो हसीन मौसम का बहाना ढूढते हैं
तो कभी ग़मगीन दिल का बहाना ढूढते हैं
कुछ नहीं तो दस्तूर का नारा लगा कर
पीने वाले तो बस पीने का बहाना ढूढते हैं

Ye rasta khud banate hain

खुद ही तय करते हैं मंज़िलें, रास्ता भी खुद बनाते हैं
जीते हैं अपनी शर्त पर, अपनी दुनिया भी खुद बनाते हैं
इन्हें इश्क़ है वतन से, मरने का कोई ग़म नहीं,
ये जांबाज़ फरिश्ते हैं, जो हर जोखिम को खुद उठाते हैं

Log kanto se munh churate hain

लोग फूलों से प्यार करते है पर काटों से मुंह चुराते हैं
फूलों की ज़िंदगी ही क्या वो तो जल्दी ही सूख जाते हैं
ज़िंदगी तो कांटों की होती है बड़ी लम्बी
जो खिलखिलाती ज़िंदगी में अपनी चुभन छोड़ जाते हैं