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Zurm Dil Lagane Ka

कहाँ से सीखें हुनर उसे मनाने का,,,
कोई जवाज़ न था उसके रूठ जाने का...

हर बात में सजा भी मुझे ही मिलनी थी,,,
जुर्म मैंने किया था उनसे #दिल लगाने का

Khuda Mehfuj Rakhe

ख़ुदा महफूज़ रखे,
आपको तीनों बलाओं से,,,

वकीलों से, हक़ीमों से,
और हसीनों की निगाहों से !!!

Fir Chirag Bujha Hai

फिर किसी का चिराग बुझा है
फिर कोई लाल अनाथ हुआ है
फिर टूट गयी है चूड़ी किसी की
फिर किसी का सिंदूर पूछा है

फिर टूटी है कोई लाठी घर की
फिर बेबस एक बाप खड़ा है
फिर रोई है आज बूढ़ी आँखे
फिर उस छाती से दूध छलका है

फिर राखी याद ना आई उसको
फिर एक भाई ना वापस लौटा है
फिर किसी का चिराग बुझा है
फिर कोई लाल अनाथ हुआ है...🙏

salute indian army

Khud Ko Bhula Baithe

हम औरों की चाह में, ख़ुद को भुला बैठे !
इन झूठों के फरेब में, सच को भुला बैठे !

इस कदर खोये इस मतलबी दुनिया में,
कि हड़पने की हवस में, हद को भुला बैठे !

हम छोड़ आये पीछे न जाने कितनी यादें,
यारो आज की धमक में, कल को भुला बैठे !

दौलत को बना रखा है अब तो ख़ुदा सबने,
यारो वैभव की चमक में, रब को भुला बैठे !

समेंट डाली ज़िंदगी सिर्फ अपने तक "मिश्र",
अब तो शान के गुमान में, सब को भुला बैठे !

Badalte Dekha Hai Humne

न जाने कितनों को, बदलते देखा है हमने
कितने रिश्तों को, बिखरते देखा है हमने

यहाँ क़ाबिले यक़ीं तो कोई भी न रहा यारो,
बहुतों की वफ़ा को, पिघलते देखा है हमने

न करो बात उल्फ़त की क्या रखा है उसमें,
प्यार के परिंदों को, फिसलते देखा है हमने

झूठी तसल्लियों से कभी दिल नहीं बहलते,
गैरों के साथ उनको, थिरकते देखा है हमने

ये बेरहम दुनिया न समझती दुःख किसी के,
जनाज़े में लोगों को, चहकते देखा है हमने

शर्म आती है हमको जब देखते हैं ऐसे सितम,
यतीमखाने में माँ को, बिलखते देखा है हमने

कभी बुलंदियों पे थे जिनके मुकद्दर के सितारे,
जमीं पे दरबदर उनको, भटकते देखा है हमने

न करता कोई भी मोहब्बत अब किसी से,
हर दिल में नफरतों को, भड़कते देखा है हमने...