फूलों से भी सुंदर चेहरे ऐसे कहीं नहीं होने चेहरे !
खुशियों में अच्छे लगते ना गुस्से साथ फुलाने चेहरे !
जिन्होंने के साथ इश्क कमाया 1 दिन पढ़ते खोने चेहरे !
जिनसे दुख सहार ना होता कमलों जैसे वह रोने चेहरे !
देखना राखस बनकर माताओं कई सदा की नींद सुलाने चेहरे
भगवान तो रहता इंसान के अंदर फिर मंदिर में क्यों झुकाने चेहरे !!!
देख लेना एक दिन धर्म के ठेकेदार लुट जाएंगे !
जो चमचे बनकर रहते वह सेवादार लुट जाएंगे !
अगर जवानी टहलने लगी फूलों की महको की तरह
सदर बाजारों के सारे ही सुनियार और लूट जाएंगे !
जब ऐसे ही करती रही समय की सरकारें
महंगाई की चपेट में आकर कई परिवार लूट जाएंगे !
मेंढक यदि खाने लगे कोबरा के सिर को ही
तब घूमने वाली कुर्सी के अधिकार लूट जाएंगे !
क्यों लड़ना मजहब की खातिर जब आपस में एकता नहीं
जो थोड़े बहुत होते सब सत्कार लुट जाएंगे !
बेईमानी जब फैल गई सूर्य की रोशनी जैसे
चंद्र कहलाते खुद को जो इमानदार लुट जाएंगे !
इंसाफ न मिला कोर्ट से कहानियां सब जीवत है
बता दे दिल्ली दर्दी को तेरे कब गुनाहगार लुट जाएंगे !
बदले नहीं हैं हम, यूं ही उलझे हुए से हैं ,
ज़माने की चाल में, कुछ अटके हुए से हैं !
न समझो कि न रहे हम पहले की तरह,
बस #खुशियों की चाह में, भटके हुए से हैं !
कभी थे दिन वो भी कि थी मस्ती ही मस्ती,
अब तो ग़मों की आग से, झुलसे हुए से हैं !
गुज़रा जमाना तो ख़यालो #ख़्वाब बन गया,
अब तो खुद के बुने जाल में, फंसे हुए से हैं !
ये #ज़िन्दगी भी कितने रंग बदलती है दोस्त,
लगता है कि भीड़ में, हम बिछड़े हुए से हैं !!!
कभी नफरतों में तुम, प्यार ढूंढो तो बात बने ,
कभी खामोशियों का, राज़ ढूंढो तो बात बने !
जो न कहता है दर्द अपने ज़माने में किसी से,
कभी तो उसके भी, अज़ाब ढूंढो तो बात बने !
इस #ज़िंदगी के सफर में मिलते हैं लाचार भी,
कभी उनके भी तुम, हालात ढूंढो तो बात बने !
क्यों कर ढूंढते हैं हम कमियां ही हर किसी में,
कभी तो अच्छाई भी, एकाध ढूंढो तो बात बने !
घुटता है बहुत कुछ इंसान के दिल में भी दोस्त,
कभी उसके भी तुम, ज़ज़्बात ढूंढो तो बात बने !
Chehre ki muskurahat se har gam ko chhupao
bahut kuchh bolo Magar kuchh na batao
khud na rutho Kabhi Magar sab ko manao
Raaz hai ye #Zindagi ka bas jite chale jao.....