Page - 39

Aadmi Ka Khoon

पीता है यहां आदमी ही आदमी का खून,
देखा ना गया मुझसे और मैं पीने लग गया ...
तुम #जिंदगी गंवाते देख ऊंचे महलो को,
मैने झौंपड़ी को देखा और जीने लग गया....

Khwabon ko bikharte dekha

जाने कितने ख्वाबों को, मैंने बिखरते देखा है,
ज़िन्दगी की सरगम को, मैंने बिगड़ते देखा है!
आदमी चलता है सोच कर हर चाल शतरंजी,
फिर भी मोहरों को अक्सर, मैंने पिटते देखा है!
जो खोदता हैं गड्ढा किसी और के लिए राहों में,
उसमें उसको ही अक्सर, मैंने फिसलते देखा है!
जो उड़ते थे आसमानों में कभी परिंदों की तरह,
न जाने कितनों को दर दर, मैंने भटकते देखा है !
लगा कर गैरों के घर में आग होते हैं खुश लोग,
पर कितनों को उसी आग मैं, मैंने जलते देखा है !
न जाने कहाँ खो गए वो मोहब्बतों के रात दिन,
अब तो राहों में शराफत को, मैंने तड़पते देखा है!
न समझोगे दोस्त इस फरेबी दुनिया का आलम,
आँखों से अगाध रिश्तों को, मैंने उजड़ते देखा है !

Ek Musafir Ho Tum

बेचैन हो कर, यूं ही, करवटें न बदलते रहिये ,
निराश हो कर, तुम यूं ही हाथ न मलते रहिये !
तुम एक #मुसाफिर हो बस इतना समझ लो,
चलना ही ज़िंदगी है, बैठ कर न उछलते रहिये !
कोंन है जो न गिरता है ज़िन्दगी के सफर में,
मगर यूं ही डर के तुम, राहें न बदलते रहिये !
न कर सको तो ना कहना भी सीख लो दोस्त,
मगर अपने किये वादों से, यूं न फिसलते रहिये !
पार करना है दरिया तो धारे में उतरिये दोस्त,
बैठ कर किनारे पे तुम, यूं ही न मचलते रहिये !!!

Fans gya hoon main

भंवर से बच गया पर, साहिल पे फंस गया हूँ मैं,
बच गया गैरों से मगर, अपनों में फंस गया हूँ मैं !
कुछ ऐसा ही मुकद्दर लिख डाला है रब ने मेरा,
कि आसमां से गिर कर, खजूर में फंस गया हूँ मैं !
मैंने भी चाहा कि उड़ता फिरूं परिंदों कि तरह,
मगर अपनों के बिछाए, जाल में फंस गया हूँ मैं !
मैं गुज़ार लेता ज़िन्दगी भी जो कुछ बची है दोस्त,
मगर खुद के ही मेरे, जज़्बात में फंस गया हूँ मैं !
ज़रा से प्यार की खातिर मिटा डाला सुकूं हमने,
अब तो बस तन्हाइयों के, दौर में फंस गया हूँ मैं !!!

Waqt Ne Sikha Diya

मेहरवानी अय वक़्त, तूने रहना सिखा दिया ,
दुनिया के सारे ग़म, तूने सहना सिखा दिया !
आसान कर दी, अपने परायों की परख तूने,
जो था लबों पर मेरे, तूने कहना सिखा दिया !
कूप मंडूक थे, न पता था बाहर का मिज़ाज़,
मिल के साथ राहों में, तूने चलना सिखा दिया !
लगाते थे तक तक कर, निशाने मुझ पे लोग,
इक बता के नया हुनर, तूने बचना सिखा दिया !
इबारत भोले चेहरों की, न समझ पाए हम,
शुक्रिया अय वक़्त कि, तूने पढ़ना सिखा दिया !