जो सच है, उसे तुम छुपाते क्यों हो !
अगर झूठ है, तो इधर आते क्यों हो !
दिल से पूछ कर जवाब देना दोस्त,
कि प्यार है तो, उसको छुपाते क्यों हो !
कहते हो कि मैं अकेला हूँ दुनिया में,
फिर रूठे हुओं को, यूं मनाते क्यों हो !
आंसुओं से पूंछो कि क्यों बेचैन हैं वो,
अपने दिल को, इतना सताते क्यों हो !
क्यों सजा रखा है इतना दर्द दिल में,
हर किसी को, बेवफा बताते क्यों हो !
दुनिया के मसले तो चलते रहेंगे दोस्त,
उलझ कर उनमें, जां फंसाते क्यों हो !
उनको तो हमारे, अहसानो वफ़ा याद नहीं !
हम मुज़रिम हैं उनके, मगर दफ़ा याद नहीं !
मोहब्बत के नाम पर मिला सिर्फ धोखा हमें,
दोस्ती की किताब का, कोई सफ़ा याद नहीं !
यूं ही ज़िल्लतों में काटी है ये उम्र हमने सारी,
थे कितनों से खुश, कितनों से ख़फा याद नहीं !
दब गए उनके कसूर सारे दौलत के ढेर में,
हमें कितना हुआ, नुकसान ओ नफ़ा याद नहीं !!!
बहुत वक़्त लगता है, किसी का यकीन पाने में !
मगर लगता नहीं एक लम्हा भी, उसे गॅवाने में !
जुबाँ की हरकतें न जाने क्या क्या कराती हैं,
उम्र गुज़र जाती है, आग लगाने और बुझाने में !
अब तो गिरगिट भी कुछ नहीं आदमी के आगे,
जाने कितने रंग भरता है, अपना रंग जमाने में !
अपनी करतूत पे बस डालते रहते हैं लोग पर्दे,
मज़ा आता है उनको तो, बस और को सताने में !
अब यही दस्तूर है दोस्त कि अपने लिए जियो,
वर्ना तो क्या रखा है इधर, औरों से जी लगाने में !
हम तो क़तरों से खुश हैं, समंदर ले के क्या करेंगे,
जब भटकना है नसीब में, तो ठाँव ले के क्या करेंगे !
जरा सी हवा से बिखर जाती है ज़िंदगी तिनकों में,
फिर तू ही बता दोस्त, कि तूफ़ान ले के क्या करेंगे !
अजीबो गरीब चाहतों ने मिटा दिया इस आदमी को,
हमें चाहिए जब चार रोटी, अधिक ले के क्या करेंगे !
जो लूटते हैं दुनिया को न जाने किस किस तरह से,
भला ऐसे महान पुरुषों से, हम हुनर ले के क्या करेंगे !
जब चाहिए थी ज़रा सी महक तब न मिल सकी ,
जब आखिरी दिन आ गए, तब चमन ले के क्या करेंगे !
Anjaan Ek Saathi Ka Iss Dil Ko Intzaar Hai,
Pyasi Hain Ye Aankhein Aur Dil Bekarar Hai...
Unke Saath Mil Jaye To Har Raah Aasan Ho Jayegi,
Shayad Issi Anokhe Ehsas Ka Naam Pyar Hai...