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Zindagi udhaar samajh kar

जीते रहे हैं ज़िन्दगी, किसी का उधार समझ कर ,
निभाते रहे हम रिश्ता, किसी को प्यार समझ कर !
देते रहे सबूत हम अपनी बेगुनाही का हर समय,
पर भुला दिया उसने, हमें गुज़री बहार समझ कर !
बदल गया है सब कुछ ये तो किस्मत की चाल थी,
मगर नज़रें घुमा लीं उसने, हमें बदकार समझ कर !
न पढ़ सके हम उसके चेहरे की इबारत को दोस्तो,
हमने तो दे दिया था दिल, अपना ऐतबार समझ कर !
अब तो ये मोहब्बत भी एक बिकाऊ चीज़ है दोस्त ,
लोग कर देते हैं माल वापस, उसे बेकार समझ कर !

Bura Waqt Aata Hai To

Bura Waqt Aata Hai To hindi shayari status

आता है बुरा वक़्त, तो उजाले भी डराने लगते हैं ,
यारो चूहे भी शेर को, अपना दम दिखाने लगते हैं !
अब कहाँ हैं वो लोग जो होते थे शरीक हर ग़म में,
अब तो दिल ही दिल, लोग खुशियां मनाने लगते हैं !
गर लेनी हो सलाह तो कही जाने की ज़रुरत क्या है,
इधर तो मुफ्त में लोग, अपनी अक्ल लगाने लगते हैं !
भुगतना है खुद को ही तो किसी को तंग क्या करिये,
लोग तो ज़रा सी बात का भी, बतंगड़ बनाने लगते हैं !
आता है अगर पतझड़ भी तो बहारें भी आती हैं दोस्त,
मगर बेसब्र इतने हैं लोग, कि कोहराम मचाने लगते हैं !

TO KYA KAROON

गर सताएं उनकी यादें, तो क्या करूँ,
गर चाहूँ उनसे मिलना, तो क्या करूँ!
हो सकती है मुलाक़ात ख्वाबों में बस,
मगर न सोएं मेरी आँखें, तो क्या करूँ!
कहते हैं लोग कि खुश रहा करो दोस्त,
मगर न मचले मेरा दिल, तो क्या करूँ!
कहते हो कि भूल जाओ गुज़रा ज़माना,
पर न निकलें दिल से बातें, तो क्या करूँ!
अरमां तो हैं मेरे भी कि खुश रहा जाये,
मगर दिल से न निकलें ग़म, तो क्या करूँ!
ये चाहत है मेरी कि न हो दुश्मनी उनसे,
मगर न बदले उनकी, आदत तो क्या करूँ!!!
 

Chehre Pe Bebasi

उनके चेहरे पे, हमने बेबसी देखी है,
मासूम सी आँखों में, बेकसी देखी है!
पहले न थी कभी ऐसी हालत उनकी,
अपने ग़मों में में,डूबी बेकली देखी है !
बहुत ढूँढा मगर न मिला उनसा कोई,
हमने भी शहर की, हर गली देखी है!
हमारे ग़मों को भले ही टाल दे कोई,
मगर औरों के लिए, खलबली देखी है!
न समझना कि कोई फरिश्ता हैं हम,
दोस्तो हमने भी, दिल की लगी देखी है !

Kaise Kategi Zindagi?

Kaise Kategi Zindagi? hindi shayari status

कैसे कटेगी ज़िन्दगी, यूं उजड़ा चमन लिए हुए,
चेहरे से उड़ती हवाइयां, दिल में रुदन लिए हुए !
ज़रा ठंडा करो इन नफरतों के शोलों को दोस्तो,
वरना न जी सकेगा शहर, इतनी तपन लिए हुए !
अय तितलियों मत जाइये गुलशन में आजकल,
अब उधर तो सिर्फ कांटे हैं, अपनापन लिए हुए !
मैं तो घुसा था इस शहर में खुशियों की तलाश में,
मगर बैठे हैं इधर भी लोग, दिल में टशन लिए हुए !
लगा दी ज़िन्दगी हमने जिसकी ज़िन्दगी के वास्ते,
अब लगा कर घात बैठा है, मेरा कफ़न लिए हुए !
किस किस को सुनाओगे दिल के अफ़साने दोस्त,
यूं कैसे जियोगे तुम इधर, ये मैला सा मन लिए हुए !!!