मेरी ज़िन्दगी की, बस इतनी सी कहानी है !
बस चेहरे पर बेबसी, और आँखों में पानी है !
समझा जिसे अपना, वो तो बेवफा निकला ;
सोचा था क्या हमने, मगर वो क्या निकला ;
मारना ही था तो फिर, ज़िन्दगी क्यों दे दी ;
अच्छा भला था मैं, ये शर्मिंदगी क्यों दे दी ;
यही रंजोग़म तो, मोहब्बत की निशानी है !
चेहरे पे बस बेबसी ,
मेरी ज़िन्दगी की ---
अपनों पे यकीन कर, पछताते रहे रात दिन ;
रिसते हुए ज़ख्मों को, सहलाते रहे रात दिन;
खा के भी धोखा, दिल में बिठाये रखा उसे ;
दुनिया के सामने, अपना बनाये रखा उसे ;
मेरे फूटे नसीब की, बस यही मेहरवानी है !
चेहरे पे बस बेबसी,
मेरी ज़िन्दगी की ----
यूं ही मुश्किलों में, ज़िन्दगी बिता दी हमने ;
पर कोंन पराया है, पहिचान करा दी सबने;
दूर किनारे पर खड़े, हाथ हिलाते रहे अपने ;
हमें डूबता हुआ देखा, तो मुस्कराते रहे अपने ;
पर लोग कहते हैं कि, यही तो ज़िंदगानी है !
बस चेहरे पर बेबसी,
मेरी ज़िन्दगी की ---
चुपके चुपके धीरे धीरे मेरे दिल तक आये तुम
बातों ही बातों में #दिल में बादल बनकर छाये तुम
अब बेताबी बढ़ा रहे हो बिजली चमका चमका कर
मुश्किल है ये #खेल दिलों का मुझको धमका धमक कर...
यहाँ हर दिन तड़पना है, हर घडी एक उदासी है,
तेरा #दीदार पाने को किस कदर आँख प्यासी है,
निकालकर घर से तू आजा कभी यूँ ही बहाने से,
तेरे बिन हूँ अधूरा बुत ,तू इसकी आत्मा सी है...
चलो हंसने की कोई, हम वजह ढूंढते हैं,
जिधर न हो कोई ग़म, वो जगह ढूंढते हैं !
बहुत उड़ लिए ऊंचे आसमानों में यारो,
चलो जमीं पे ही कहीं, हम सतह ढूंढते हैं !
छूटा संग कितनों का ज़िंदगी की जंग में,
चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं !
बहुत वक़्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में,
चलो अँधेरी रात की, हम सुबह ढूंढते हैं !!!