Naa Jane Dost Kaha Hoga?
कुछ सालों बाद ना जाने क्या होगा,
ना जाने कौन दोस्त कहाँ होगा...
फिर मिलना हुआ तो मिलेगे यादों में,
जैसे सूखे हुए #गुलाब मिले किताबों में...
कुछ सालों बाद ना जाने क्या होगा,
ना जाने कौन दोस्त कहाँ होगा...
फिर मिलना हुआ तो मिलेगे यादों में,
जैसे सूखे हुए #गुलाब मिले किताबों में...
मकां तो मिलते हैं मगर, कोई भी घर नहीं मिलता !
अब ईंट और गारे में, दिलों का असर नहीं मिलता !
सब कुछ पाने की ललक तो दिखती है हर जगह,
पर कहीं ख़ुदा के दिए, हिस्से में सबर नहीं मिलता !
अब तो करते हैं लोग दोस्ती सिर्फ मतलब के लिए,
जो #ज़िन्दगी भर निभा दे, वो हमसफ़र नहीं मिलता !
किसी के सुख से ग़मज़दा मिल जाएंगे हज़ारों लोग,
पर किसी के दुःख में भी रोये, वो अक्सर नहीं मिलता !
जिधर देखता हूँ उधर, अँधेरा ही अँधेरा है !
न जाने कितनी दूर, मेरी रात का सवेरा है !
बामुश्किल बचा हूँ मैं दुश्मनों के चंगुल से,
मगर अफ़सोस मुझे, अपनों ने आ के घेरा है !
क्या गुल खिलाते हैं लोग देखना है ये आगे,
यहां तो हर तरफ, बस डाकुओं का बसेरा है !
ख़ुशी का कोई कोना न मिलता ढूंढने से अब,
जिधर देखो बस उधर, अब दहसतों का घेरा है !
लड़ रहे हैं लोग सब हड़पने को चीज़े गैरों की,
पर भूलते हैं कि दुनिया में, न मेरा है न तेरा है !
कब तक बचोगे दोस्त जमाने की साजिशों से,
दुनिया में हर शख्स ही, दिखता अब लुटेरा है !!!
मिली है ज़िन्दगी, तो जीना भी आएगा,
दुनिया के ग़मों को, सहना भी आएगा !
अभी #उदास हैं ज़माने के सताए हैं हम,
मगर कभी तो यारो, हंसना भी आएगा !
चुप चुप के जी रहे हैं अब तलक तो हम,
पर एक दिन जुबां से, कहना भी आएगा !
हैं #नफरतें ही जिनका धरम आज कल,
कभी #मोहब्बत से उन्हें, रहना भी आएगा !
वक़्त की चट्टानों ने रोका है जिस पानी को,
बंधनों के हटते ही, उसे बहना भी आएगा !
जिधर देखता हूँ वो अपने से दिखते हैं सब,
कभी कसौटी पे, उनको कसना भी आएगा !!!