न तो ग़मों का गम है, न ख़ुशी की ख़ुशी हमको !
भट्टी में पका चुकी है खूब, ये ज़िन्दगी हमको !
या ख़ुदा वो वक़्त मत लाना मुकद्दर में हमारे,
कि कभी अपने ही सबब से, हो शर्मिंदगी हमको !
इन आंसुओं की कीमत नहीं जानती ये दुनिया,
अब तो इनको देख कर ही, आती है हंसी हमको !
हर मोड़ पर तकती रहीं दुनियां की बेरहम नज़रें,
हर कदम पर बस रुलाती रही, ये ज़िन्दगी हमको !
न लो दर्द ए दिल किसी और की खातिर दोस्त,
वर्ना तो छोड़ देगी मंझधार में, ये ज़िन्दगी हमको !
वक़्त ने मुझे तांगे का घोड़ा बना दिया,
आँखों में पट बांध आधा अंधा बना दिया !
दुनिया घूम ली पर दुनिया न देख पाया,
उसने अपने ईशारे का गुलाम बना दिया !
इक लीक पर चलता रहा मैं रात दिन,
दुनिया से एक दम अन्जान बना दिया !
अब बंधा हूँ एक खूंटे से एक मुद्दत से,
हौसला अब भी है पर नाकाम बना दिया !!!
कभी तो बहार आएगी, कभी नूरे चमन बदलेगा ,
ख़ुदा पे है यकीं इतना कि, कभी तो करम बदलेगा !
आएगा कभी होठों पे किलकारियों का मौसम भी,
यारो कभी तो ज़र्द चेहरे का, कुछ तो रंग बदलेगा !
हम आज तो बदनाम हैं पहचानता हमें कोई नहीं,
कभी तो दिल से लोगों के, वो पुराना भरम बदलेगा !
कुछ भी न बदला अब तक सब कुछ तो है वैसा ही,
जीता रहा इस आस में कि, कभी तो वतन बदलेगा !!!
कुछ देखा हुआ सा, कुछ परखा हुआ सा लगता है,
ज़िन्दगी का हर सवाल, उलझा हुआ सा लगता है !
बढ़ जाती हैं बेचैनियां कभी कभी इस कदर दोस्तो,
कि दिल का कोई टुकड़ा, खोया हुआ सा लगता है !
बनाया था जो हमने कभी महल सपनों का जतन से,
कभी कभी बस यूं ही हमें, बिखरा हुआ सा लगता है !
न रहीं वो महफ़िलें न रहीं वो दोस्तों की ठिठोलियाँ, #ज़िन्दगी का हर कदम, मुझे ठहरा हुआ सा लगता है !
वक़्त का सितम बदल देता है# नसीब कुछ इस तरह ,
कि हर तरफ ग़मों का धुआं, गहरा हुआ सा लगता है !