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Itna Neeche Mat Giro

न गिरो नीचे इतना, कि निकलने में मुश्किल होगी !
जब होंगे जुदा दो दिल, तो मिलने में मुश्किल होगी !
गर कानों के कच्चे हो तो न बनाओ रिश्ते किसी से,
वरना तो दूर तक, साथ चलने में ज़रा मुश्किल होगी !
दिमाग से बिचार लो कुछ भी करने से पहले दोस्त,
वरना असलियत जानोगे, तो जीने में मुश्किल होगी !
जो वक़्त गुज़र गया उसे बिसारने में भलाई है,
वरना #सफर आगे का, कटने ने में ज़रा मुश्किल होगी !

Zindagi Jeena Sikhati Hai

कभी कभार ज़िन्दगी, हमें आँख दिखा देती है
पर उसकी ये धमकी, हमें जीना सिखा देती है
बहुत जुदा है मेरे ज़ख्मों का मरहम साहिबान,
#दर्द रहता है मगर, वो निशानों को मिटा देती है
हम तो कह देते हैं जो आता है #दिल में हमारे,
पर लोगों की समझ, तिल का ताड़ बना देती है
कैसे भूल जाएँ हम उनके दिए ज़ख्मों को यारो,
उनकी तो हर चाल हमें, बद हवास बना देती है
चाहे #ज़िंदगी भी दे दें हम किसी के लिए ,
मगर ज़रा सी भी बात हमें, दुश्मन बना देती है

Koi na mujhse roothe

आरज़ू थी मेरे दिल की, कि कोई न मुझसे रूठे !
इस ज़िन्दगी में अपनों का, कभी न साथ छूटे!
करता रहा उम्र भर कोशिशें कुछ इस कदर मैं,
कि रिश्तों की मुलायम डोर, न ज़िन्दगी भर टूटे !
मगर अफसोस न समझा कोई मेरे दर्द को यारो,
गफ़लत की उड़ान में, न जाने कितनों के पर टूटे!
कानों में उड़ेले ज़हर ने ऐसा गुल खिलाया,
कि न जाने कितनों के घर टूटे कितनों के सर फूटे!

Dushman sath chalte hain

साजिशों की दुनिया में, सिर्फ चेहरे बदलते हैं!
हम जिधर भी जाते हैं, दुश्मन साथ चलते हैं!
क्यों करते हैं भरोसा हम अपनों पर इतना,
वक़्त पड़ने पे अक्सर, यही ईमान बदलते हैं!
देकर वफ़ा की दुहाई घुस तो आते हैं दिल में,
मगर यही ज़िन्दगी में फिर, ज़हर उगलते है!
ये शातिरों की बस्ती है ज़रा संभल के रहिये,
यहां तो पल पल शातिरों के, अंदाज़ बदलते हैं!

Zindagi ka maza kya hota

बिना रंजोगम के, ज़िन्दगी का मज़ा क्या होता
अगर न होती हार, तो जीत का मज़ा क्या होता
वही जानता है गुज़रती है जिसके दिल पे मगर,
न टूटते दिल, फिर मोहब्बत का मज़ा क्या होता
चाहत है सबको ही अपनी मंज़िल पाने की मगर,
न होते राह में कांटे, तो सफर का मज़ा क्या होता
ज़िन्दगी तो बस चाहतों का इक झमेला है,
न होती ये ख्वाहिशें, तो सपनों का मज़ा क्या होता !!!