अब दिल के ज़ख्म, फिर हरे होने लगे हैं !
हम ग़मों से अब, फिर लवरेज़ होने लगे हैं !
देख कर काली घटाओं का ये सुहाना मौसम,
अब दिल के आँगन में, फसाद होने लगे हैं !
जाग कर गुज़ार दीं जिनके लिए कितनी रातें,
अफ़सोस कि वो, किसी और के होने लगे हैं !
टूटे हुए दिल को अब भला कैसे संभालें दोस्त ,
उसके तो सारे ख़्वाब, अब तमाम होने लगे हैं !
कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये,
तेरे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाये,
अजीब हालात हुए कि #दिल का सौदा हो गया, #मोहब्बत की हवेली जिस तरह नीलम हो जाये,
मैं खुद भी तुझसे मिलने की कोशिश नहीं करूँगा,
क्योंकि नहीं चाहता कोई मेरे लिए #बदनाम हो जाये,
उजाले अपनी यादों के मेरे साथ रहने दो,
जाने किस गली में #जिंदगी की शाम हो जाये...
वक़्त के गुज़रते ही, बुरे दिन भी टल जाते हैं !,
मगर कितने ही लोग, दिल से निकल जाते हैं !
न मिला पाते हैं वो फिर नज़रों से नज़रें कभी,
सर झुका कर के वो, चुप चाप निकल जाते हैं !
मिलते हैं गलत लोग भी इस ज़िन्दगी में यारो,
मगर बदौलत उनकी ही, कदम संभल जाते हैं !
बड़ी मतलबी बड़ी अजीब दुनिया है ये दोस्त ,
वक़्त बदलते ही, लोगों के मुखौटे बदल जाते हैं !
कर ले ऐतबार खुद पर, ये सहारे छूट जाएंगे,
जिन्हें कहता तू अपना, कभी भी रूठ जाएंगे !
करता है प्यार जिनसे तू खुद से भी अधिक,
तेरे देखते ही देखते, वो सब कुछ लूट जाएंगे !
समझ पाएगा जब तक दुनिया के कारनामे,
कभी देखे थे ख़्वाब प्यारे से, सारे टूट जाएंगे !
मत छेड़िये कभी खामोश दरिया को,
मचल गया जिस दिन, तो किनारे टूट जाएंगे !