दिल के शोलों की जलन, हमसे पूछो,
कैसी है कांटो की चुभन, हमसे पूछो,
हो चुका है ख़त्म दौर-ए-शराफत अब,
दोरंगी दुनिया का चलन, हमसे पूछो,
न समझो माली को बगीचे का मालिक,
अब कैसे उजड़ते हैं चमन, हमसे पूछो,
आज़ाद #ज़िंदगी जीना तो सपना है अब,
कैसे होता है उसका दमन, हमसे पूछो,
न उठाये फिरिये ग़मों का पहाड़ "मिश्र",
इसमें होता है कितना वजन, हमसे पूछो !!!
Mohabbat unki ek #Zindagi se kam nahi,,,
Mili hai uski #Mohabbat isiliye to koi gam nahi...
Aye mere khuda ek ehsan karde mujh pe
Khushian hi milen unhe chahe jayein kahi...
Rone Ki Saza Hai Na Rulane Ki Saza Hai,,,
Ye Dard #Mohabbat Ko Nibhane Ki Saza Hai...
Hanste Hain To Aankhon Se Nikalte Hain Aansoo,,,
Ye Uss Shakhs Se Dil Lagane Ki Saza Hai !!!
हम तो बस अपनों की दगा से डरते हैं,
तूफ़ान झेल कर भी हवा से डरते हैं !
दुश्मनों से कोई शिकवा गिला नहीं,
मगर हम #दोस्तों की ज़फ़ा से डरते हैं !
नफरतों का कोई भी डर नहीं हमको,
मगर हम #मोहब्बत की सजा से डरते हैं !
बहुत रंग देखे हैं इस जमाने के हमने,
हम ज़हर से नहीं बस दवा से डरते हैं !
हमें ग़म नहीं इस दुनिया के सितम का,
हम तो बस अपनी ही खता से डरते हैं !!!
कैसी सजा है ये #ज़िन्दगी, ये हमसे न पूँछिये ,
कैसे गुज़रते हैं ये रात दिन, हमसे न पूँछिये !
बामुश्किल भूल पाए हैं गुज़रे जमाने को हम,
कैसे बिखरती है ख्वाहिशें, ये हमसे न पूँछिये !
जिन्हें रास आया हे जीना उन्हें दुआ है हमारी,
मगर मरते हैं कैसे घुट घुट के, हमसे न पूँछिये !
रोशन हैं घर जिनके मुबारक हो रौशनी उन्हें,
मगर कैसे पसरते हैं सन्नाटे, ये हमसे न पूँछिये !
खुश रहें इस दुनिया के लोग तमन्ना है हमारी,
पर आंसुओं की कीमत है क्या, हमसे न पूँछिये ! #ज़िन्दगी उलझन के सिवा कुछ भी नहीं दोस्त,
लोग कैसे कुचलते हैं अरमां, ये हमसे न पूँछिये !!!